mahashivratri 2021 mai kab hai
विशेष जानकारी

Mahashivratri 2021 Date | महाशिवरात्रि 2021 कब है

महाशिवरात्रि 2021 में कब है जानें सही तारीक 11 या 12 मार्च ?

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. इस दिन भक्त भगवान भोलेनाथ जी का व्रत रख उनकी पूरी श्राद्ध भाव से पूजा करते है. यह भगवान शिव के पूजन का सबसे बड़ा पर्व भी है।

बता दे की साल 2021 में महाशिवरात्रि के दिन कल्याणकारी शिव योग बन रहा है। जिससे कई दोषों से मुक्ति मिलेगी। देवों के देव महादेव प्रसन करने के लिए महाशिवरात्रि से बेहतर कोई दिन नहीं है। महाशिवरात्रि के दिन यदि जातक सच्चे मन और सही विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा आराधना करें तो जातक पर जल्द ही भोलेनाथ की कृपा बरसने लगती है.

महाशिवरात्रि – भूलकर भी न करे ये काम :-

  1. इन खाध पर्दाथों रहें दूर :- वे भक्त जो शिवरात्रि का व्रत रख रहे है वे इस दिन चावल, दाल और गेहूँ से बने खाध पर्दाथों से दूर रहे. शिवरात्रि व्रत पर आप फल आदि ग्रहण कर सकते है.
  1. काले वस्त्र न पहनें :- शिवरात्रि के दिन यदि आप भगवान शिव जी को यदि प्रसन करना चाहते है तो इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें. शिवरात्रि का व्रत या भगवान जी की पूजा अर्चना करते समय काले वस्त्रों को धारण न करें।
  1. शिवलिंग पर चढ़ाए प्रसाद का न करें इस्तेमाल :- ऐसे मान्यता है की शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को भक्तजनों को ग्रहण नहीं करना चाहिए क्योकि इससे दुर्भाग्य का प्रवेश होता है. और परिवार में धन हानि होने की सम्भावना बढ़ जाती है.
  1. शिवलिंग पर न चढ़ाए तुलसी :- शिव पूजा के दौरान ध्यान रखे की कभी भी शिवलिंग पर तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए जलंधर नामक असुर की पर्ति वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ था जिसे भगवान विष्णु ने पर्ति रूप में स्वीकार किया है। इसलिए तुलसी से शिव जी की पूजा नहीं होती है। अतः शिवलिंग पर इसे अर्पित करना वर्जित है.
  1. शिव पूजा में टूटे हुए चावल न चढ़ाये :- भगवान शिव की पूजा में कभी भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाये जाते, अक्षत का अर्थ होता है अटूट चावल, यह पूर्णता का प्रतिक है, इसलिए शिव पूजा में भोलेनाथ जी को अक्षत चढ़ाते समय यह अवश्य देख लें की चावल टूटे हुए तो नहीं है.

महाशिवरात्रि व्रत की तिथि और मुहूर्त


साल 2021 में महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च गुरूवार के दिन मनाया जायेगा।

निशिता काल का मुहूर्त होगा – 11 मार्च, प्रातः 12:06 मिनट से 12:55 मिनट तक

पूजा की कुल अवधि – 48 मिनट

पहला प्रहार – 11 मार्च, शाम 06:27 मिनट से 09:29 मिनट तक

दूसरा प्रहार – 11 मार्च, रात्रि 09:29 मिनट से 12:31 मिनट से

तीसरा प्रहार – 11 मार्च, रात्रि 12:31 मिनट से 03:32 मिनट तक

चौथा प्रहार – 12 मार्च, प्रातः 03:32 मिनट से सुबह 06:34 मिनट तक

शिवरात्रि पारण का समय – 12 मार्च, प्रातः 06:34 मिनट से शाम 03:02 मिनट तक

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Graha Gochar
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